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है एक देश पाताल गया प्‍यासी धरती के लिए अमृतघट लाने को

January 4th, 2009 Leave a comment Go to comments

सीखे नित नूतन ज्ञान,नई परिभाषाएं,
जब आग लगे,गहरी समाधि में रम जाओ;
या सिर के बल हो खडे परिक्रमा में घूमो।
ढब और कौन हैं चतुर बुद्धि-बाजीगर के?

गांधी को उल्‍टा घिसो और जो धूल झरे,
उसके प्रलेप से अपनी कुण्‍ठा के मुख पर,
ऐसी नक्‍काशी गढो कि जो देखे, बोले,
आखिर , बापू भी और बात क्‍या कहते थे?

डगमगा रहे हों पांव लोग जब हंसते हों,
मत चिढो,ध्‍यान मत दो इन छोटी बातों पर
कल्‍पना जगदगुरु की हो जिसके सिर पर,
वह भला कहां तक ठोस कदम धर सकता है?

औ; गिर भी जो तुम गये किसी गहराई में,
तब भी तो इतनी बात शेष रह जाएगी
यह पतन नहीं, है एक देश पाताल गया,
प्‍यासी धरती के लिए अमृतघट लाने को।

- रामधारी सिंह “दिनकर”

Looks like this Hindi Poem “Bharat”, written by well known poet Ramdhari Singh “Dinkar”, suits well today.


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  1. ajay kumar ja
    May 24th, 2009 at 19:23 | #1

    aise rachna sunkar aasa ki lahar daur uthi hai manme .man hataas kaise ho sakta hai ,dinkar ji ki kritiyo ke rahte

  2. May 24th, 2009 at 21:19 | #2

    Jha Sahab… Saht Pratishat Satya Vachan kahe aapne…

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